ग्राम विकास राशि से उद्योगपति को फायदा! आबादी छोड़ जंगल में बनी नाली, सड़क और कचरा शेड, घटिया निर्माण से फटने लगी नाली
गांव डूबे या सूखे, फर्क नहीं! जंगल में बह रही विकास की गंगा, पंचायत की मनमानी से फटने लगी नाली
रवि शुक्ला, सीधी
मझौली जनपद के ग्राम पंचायत परसिली में इन दिनों “विकास” का नया मॉडल देखने को मिल रहा है—जहां जरूरत नहीं, वहीं कर दिया गया काम! गांव की गलियों में पानी भले ही भरा रहे, लेकिन जंगल में बनी नाली अब “विकास की मिसाल” बन चुकी है।
भले ही लोग कीचड़ और गंदगी से जूझ रहे हों, लेकिन पंचायत के जनप्रतिनिधियों की नजर वहां नहीं पड़ती होगी, हां, जंगल जरूर उन्हें ज्यादा “उपयुक्त” लगा, जहां लाखों रुपये खर्च कर नाली, सड़क और कचरा शेड बना दिए गए।
अब हालत यह है कि जिस नाली को विकास का प्रतीक बताया जा रहा था, वही कुछ ही समय में फटने लगी है, लगता है निर्माण कार्य में इतनी “ईमानदारी” बरती गई कि सीमेंट भी शर्म से दरारें लेने लगा।
ऐसा लगता है कि पंचायत ने शायद नई योजना बनाई है—“जहां आबादी नहीं, वहीं सुविधा सही।” क्योंकि जहां लोग रहते हैं, वहां काम करने से सवाल उठते हैं, लेकिन जंगल में कोई पूछने वाला नहीं होता।
पंचायत के जिम्मेदारों की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह विकास है या “व्यवस्थित उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का खेल”?
यह है पूरा मामला
जनपद क्षेत्र मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत परसिली में ग्राम विकास की राशि से निजी उद्योगपति को लाभ पहुंचाया जा रहा है,
ग्रामीणों के मुताबिक अनुपयोगी स्थान में जहां एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कार्य हो रहा है उसे लाभान्वित करने के लिए 26 लाख रुपए का निर्माण कार्य करा कर भुगतान भी कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पांचवा राज्य वित्त आयोग मद से पतेरा हाउस जिसके मालिक सूर्या सिंह हैं के घर से हरहिया नाला तक पक्की नाली निर्माण का कार्य ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया है जबकि उस स्थान में ना तो कोई आबादी है और ना ही उपयोगिता है क्योंकि वह जंगल से घिरा क्षेत्र है।ऐसे में ग्रामीणों का सवाल उठाना स्वाभाविक है कि आखिर किसके दबाव में यह कार्य कराया गया है। मिली जानकारी अनुसार यह हाउस एक रिसॉर्ट है
उसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक सूर्या सिंह के हाउस तक सड़क निर्माण, जहां पुलिया निर्माण,सुदूर सड़क एवं दो कचरा शेड निर्माण किया गया है जिसमें लगभग 26 लाख रुपए के लागत से कार्य कराए जा चुके हैं।
उद्योगपति के हाउस तक 26 लाख रुपए का कराया गया निर्माण कार्य
पंचायत सचिव सुरेश वैस ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्य उनके कार्यकाल से पहले के हैं, जबकि कुछ नाली के अधूरे कार्य उनके आने के बाद पूरे कराए गए हैं.
सचिव के अनुसार, सुदूर सड़क निर्माण पर लगभग 7 लाख रुपए, पुल निर्माण पर 11 लाख 49 हजार रुपए तथा नाली निर्माण पर करीब 8 लाख रुपए खर्च किए गए हैं. उन्होंने बताया कि जब ये कार्य प्रारंभ हुए थे, उस समय पंचायत में विनोद गुप्ता जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उनके पदभार ग्रहण करने के बाद बचा हुआ नाली निर्माण कार्य पूरा कराया गया. ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर खर्च हुई बड़ी राशि अब सवालों के घेरे में है।
बिना मानक बोर्ड जंगल में करा दिया लाखों का निर्माण
ग्राम पंचायत परिसिली में बिना मानक बोर्ड लगाए ही जंगल में लाखों रुपए के निर्माण कार्य करा दिए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जब कार्य स्थल में मीडिया पहुंची तो वहां देखा गया की संबंधित स्थल पर न तो कार्य से जुड़ा कोई सूचना बोर्ड लगाया गया और न ही लागत व योजना की जानकारी सार्वजनिक की गई। ऐसे में यह समझ पाना मुश्किल है कि कार्य किस योजना के तहत और किस स्वीकृति से कराया गया.
पंचायत द्वारा सड़क, नाली और अन्य निर्माण कार्यों पर लाखों रुपए खर्च किए गए, सरपंच ,सचिव द्वारा मनमाने तरीके से कार्य कराए गए हैं जहां नियमों की अनदेखी की जा रही है। बिना मानक बोर्ड के निर्माण कार्य कराना शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना जाता है.
मामला जो कुछ भी हो यह तो जांच का विषय है.हालांकि इसके पहले भी कुछ अखबारों में खबर प्रकाशन किया जा चुका लेकिन कोई ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशन के बाद क्या कुछ कार्यवाही की जाएगी।

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