मझौली कॉलेज में प्राचार्य व ठेकेदार की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का आरोप, करोड़ों की खरीदी पर उठे सवाल
रवि शुक्ला,मझौली
सीधी जिले के शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय मझौली में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) मद से जारी ₹102.15 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह राशि कॉलेज में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए आधुनिक सुविधाएं—फर्नीचर, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर विज्ञान प्रयोगशाला और खेलकूद उपकरण—उपलब्ध कराने के लिए स्वीकृत की गई थी। कॉलेज से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि खरीदी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य डॉ. गीता भारती ने जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से अपने कथित चहेते ठेकेदार को टेंडर दिलाया। बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार लंबे समय से कॉलेज में प्राचार्य की सहमति से कार्य करता आ रहा है।
घटिया सामग्री, ऊंचे दाम का आरोप
आरोपों के अनुसार, खरीदी गई सामग्री—जैसे किताबें, कुर्सियां, टेबल, अलमारियां, प्रयोगशाला उपकरण और खेलकूद सामग्री—की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है, जबकि भुगतान उच्च दरों पर किया गया। दावा किया जा रहा है कि आधे दाम में घटिया सामग्री खरीदकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया है।
जांच की उठ रही मांग
छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से जेम पोर्टल के माध्यम से हुई खरीदी और सामग्री की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों के हितों को गंभीर नुकसान होगा।
प्राचार्य पर भी विवादों के लगे आरोप
कॉलेज से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर बताया कि जब से डॉ. गीता भारती ने महाविद्यालय का प्रभार संभाला है, तब से कॉलेज लगातार विवादों में बना हुआ है। आरोप है कि अब तक कॉलेज में परीक्षा केंद्र स्थापित नहीं हो पाया, जबकि इसके लिए विभाग को कोई ठोस पहल नहीं की गई।
पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित होने और कर्मचारियों के साथ समन्वय की कमी की भी शिकायतें सामने आई हैं। लोगों का यह भी कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण अनियमितताओं को बढ़ावा मिला है।जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो महाविद्यालय की स्थिति और खराब हो सकती है।
फिलहाल, लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगले अंक में खरीदी गई सूची सहित सामग्री का नाम और उसके मूल्य का भी खुलासा किया जाएगा।तब तक बने रहे हैं

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