शदियों से आस्था का केंद्र है कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गणेश मंदिर

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शदियों से आस्था का केंद्र है कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गणेश मंदिर



शदियों से आस्था का केंद्र है कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गणेश मंदिर 


शहडोल।
 जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित गणेश मंदिर तकरीबन 1400 सालों से आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह गणेश प्रतिमा कल्चुरी काल में तत्कालीन राजाओं के द्वारा स्थापित कराई गई थी । किसी जमाने में जहां घनघोर जंगल हुआ करता था। कलेक्ट्रेट या आसपास किसी भी चीज का नामोनिशान नहीं था। भयानक जंगल होने के कारण इस मंदिर के आसपास जंगली जीव जंतुओं का डेरा रहा करता था। जब शहडोल जिला अस्तित्व में आया उसके बाद से इस मंदिर के आसपास कुछ रौनक आने लगी। तकरीबन 70 साल पहले यहां पहुंचे पंडित सुरेंद्र द्विवेदी ने जिन का स्वर्गवास हो गया है उन्होंने यहां आकर इस मंदिर की साफ सफाई की और यहां अपना डेरा जमा लिया। इसके बाद से इस मंदिर का कायाकल्प शुरू हुआ और लोगों का आना जाना भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिले भर से लोग अपनी फरियाद लेकर अधिकारियों के पास आते हैं लेकिन ऐसा माना जाता है कि अपनी फरियाद लेकर जो व्यक्ति सबसे पहले इस गणेश मंदिर में आता है और मत्था टेकता है उसकी फरियाद जल्दी पूरी हो जाती है । मान्यता है कि यहां पर केवल भक्ति और भावना की जरूरत है चढावे के तौर पर भगवान गणेश को नारियल और मोदक का प्रसाद लगता है।  इस गणेश मंदिर में गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है सुबह शाम आरती होती है और भगवान का भगवान गणेश का श्रंगार होता है । स्वर्गीय पंडित सुरेंद्र द्विवेदी की सुपौत्री शीलू द्विवेदी यहां रहकर मंदिर की सेवा और व्यवस्था में पूरा मन लगाकर काम करती हैं। यहां आने वाले श्रद्घालु भी मंदिर के प्रति आस्था रखते हुए सहयोग करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान यहां पर पूरे 10 दिनों तक धार्मिक आयोजन जारी रहते हैं।

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