Digital Arrest: कहीं डिजिटल साइबर के न हो जाएं शिकार,इस तरह रहना होगा सावधान

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Digital Arrest: कहीं डिजिटल साइबर के न हो जाएं शिकार,इस तरह रहना होगा सावधान


Digital Arrest: कहीं डिजिटल साइबर के न हो जाएं शिकार,इस तरह रहना होगा सावधान


Digital Arrest: साइबर जालसाज लोगों को नए-नए तरीके से ठगी का शिकार बना रहे हैं। गोरखपुर में रोजाना चार से पांच मामले सामने आते हैं। बीते एक माह के भीतर आधा दर्जन से अधिक तरीके सामने आए हैं, जिनसे लोगों को शिकार बनाकर जालसाजों ने ठगी की है।
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि वर्तमान में डिजिटल अरेस्ट के सहारे ठगी ज्यादा हो रही है। सावधानी बरतकर ही इससे बचा जा सकता है।

इस तरह लोगों को बनाते हैं शिकार

साइबर थाना से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान में डिजिटल अरेस्ट, वॉयस क्लोनिंग, एकाउंट और एटीएम कार्ड बंद होने, अश्लील चैटिंग, रेटिंग लाइक्स और कमेंट, घर बैठे पैकिंग के नाम पर रुपये कमाने, मॉडलिंग का विज्ञापन देकर सहित अन्य तरीकों से जालसाज ठगी कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा ठगी डिजिटली अरेस्ट की सामने आ रही है। शहर में आए दिन कोई न कोई ठगी का शिकार बन रहा है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

 साइबर एक्सपर्ट एसआई उपेंद्र सिंह ने बताया कि जालसाजी करने वाले साइबर ठग कुछ मोबाइल नंबरों पर कॉल करते हैं। इसमें किसी इनाम या ऑफर का लालच देकर बैंक की डिटेल ले लेते हैं। अपनी बातों में उलझाकर ओटीपी भी प्राप्त करते हैं। इसके बाद वह कुछ ही देर में रुपये गायब कर देते हैं। लोगों की फेसबुक प्रोफाइल हैक करके उनके परिचितों को मैसेज भेजकर मुसीबत में फंसे होने की बात करते हुए रुपये मांगते हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट

 डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग किसी को शिकार बनाते हैं। तो वह फोन करके बताते हैं कि उनके बेटे या परिवार के किसी सदस्य के नाम से कोई शिकायत दर्ज हुई है। पीड़ित को काफी डराया जाता है, जिससे वह घबरा जाता है। इससे वह घर से नहीं निकलता है। दूसरा फोन करके पीड़ितों को मदद देने का आश्वासन दिया जाता है। इसके बाद जालसाज की बात मानकर दिए गए बैंक नंबर पर रुपये का ट्रांजेक्शन कर देता है।

इस तरह से करें जालसाजी से बचाव

-ऑनलाइन ऑफर या छूट के बहकावे में न आएं।
-अनजान व्यक्ति जब भी फोन करे तो उसकी बातों में न आएं।
- किसी के मदद मांगने या लिंक पर क्लिक करने की बात कहने पर सावधान हो जाएं।
-मदद मांगने वाले व्यक्ति की बात पर तत्काल यकीन करने की बजाय परिचितों को फोन करके सूचना पुष्ट करें।
-फेसबुक, एक्स, इंस्ट्राग्राम इत्यादि की आईडी का पासवर्ड स्ट्रांग रखें।
- बैंक कर्मचारी कभी भी फोन पर जानकारी नहीं मांगते हैं। यदि कोई जानकारी मांगे तो सजग हो जाएं।

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