महुआ लड्डू और कुकीज से मझौली के गजरी गांव की महिलाओं की बदल रही तकदीर
सीधी
सीधी जिले के विकासखंड मझौली अंतर्गत ग्राम गजरी में महिलाओं ने महुआ को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन एवं इंस्टीट्यूट ऑफ लाइवलीहुड रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सहयोग से संचालित हरित भारत फंड परियोजना के अंतर्गत यहां महुआ प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की गई है, जहां 25 से 30 महिलाएं महुआ लड्डू एवं महुआ कुकीज का निर्माण कर रही हैं।
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आग से नुकसान से लेकर नेट से नवाचार तक
कुछ वर्ष पूर्व तक गांव की महिलाएं महुआ एकत्रित करने के लिए पेड़ों के नीचे आग लगा देती थीं, जिससे मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता था। उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही थी और बाजार में महुआ का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता था। महिलाओं के पास आत्मनिर्भर बनने का कोई सशक्त साधन नहीं था।
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इसी बीच हरित भारत फंड परियोजना की पहल पर सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट स्वामी शरण कुशवाहा एवं परियोजना प्रबंधक हिमांशु भारद्वाज ने गांव में उत्पादक समूहों का गठन कर जागरूकता अभियान प्रारंभ किया। महिलाओं को महुआ को नेट के माध्यम से एकत्रित करने का प्रशिक्षण दिया गया। नेट उपलब्ध न होने पर पुरानी साड़ियों से जाल तैयार कर महुआ संग्रहण कराया गया। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि बेहतर गुणवत्ता के कारण अधिक दाम भी मिलने लगे।
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बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाओं ने वन विभाग और आजीविका मिशन से संपर्क किया, जिसके बाद कई महिलाओं को महुआ नेट उपलब्ध कराए गए। आज गांव की अधिकांश महिलाएं नेट से महुआ संग्रहण कर रही हैं और इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।
महुआ प्रसंस्करण केंद्र आजीविका का नया केंद्र
महिलाओं को स्थायी आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम गजरी में महुआ प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की गई। यहां तैयार किए जा रहे महुआ लड्डू एवं कुकीज स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना रहे हैं।
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केंद्र का उद्घाटन एवं भ्रमण क्षेत्रीय विधायक श्री कुवर सिंह टेकाम द्वारा किया गया। सीधी संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने भी केंद्र का निरीक्षण कर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए।
महुआ उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। महुआ लड्डू एवं कुकीज को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला सहित मंत्रियों एवं विधायकों को भेंट किया गया। सांसद डॉ. राजेश मिश्रा द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भी महुआ उत्पाद भेंट किए गए।
26 जनवरी पर नई परंपरा
जिले के कलेक्टर के निर्देश पर 26 जनवरी को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी श्री शैलेंद्र सिंह सोलंकी एवं जिला परियोजना प्रबंधक मध्य प्रदेश राज्य अजीविका मिशन श्री पुष्पेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में कई विद्यालयों में बूंदी के स्थान पर महुआ लड्डू वितरित किए गए। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद अधिकांश विद्यालयों में इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर महुआ लड्डू का वितरण हुआ, जिससे स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा मिला।
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राष्ट्रीय मंचों पर पहचान
महुआ उत्पादों के प्रचार-प्रसार हेतु महिलाओं ने 3-4 दिसंबर 2025 को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया। भोपाल स्थित आजीविका मार्ट में भी उत्पाद पहुंचाए गए। इसके अतिरिक्त इंटरनेशनल विन्ध्य फिल्म फेस्टिवल में तीन दिवसीय स्टॉल लगाकर व्यापक प्रचार किया गया।
हाल ही में आईसीएआर-राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र ऑन मीट, राजेंद्र नगर, हैदराबाद में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी महिलाओं ने स्टॉल लगाया, जहां उन्हें प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक श्री रमन वाधवा को भी महुआ लड्डू एवं कुकीज भेंट किए गए।
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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
आज ग्राम गजरी की महिलाएं न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूक हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बन रही हैं। मंजू सिंह, कलावती साकेत, श्यामकली, प्रेमवती, चंद्रवती, गीता देवी, नॉनवाई सीता, पंचवती एवं चंदकली सिंह सहित कई महिलाएं इस केंद्र में कार्य कर रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
महुआ, जो कभी केवल पारंपरिक संग्रहण तक सीमित था, आज मूल्य संवर्धन के माध्यम से आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। ग्राम गजरी की यह पहल न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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