पुलिस विभाग में भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने किया बड़ा बदलाव

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पुलिस विभाग में भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने किया बड़ा बदलाव



पुलिस विभाग में भर्ती को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने किया बड़ा बदलाव

 
भोपाल।
अपर मुख्य सचिव, गृह डॉ. राजेश राजौरा ने बताया है कि पुलिस विभाग में उच्चतर पद पर कार्यवाहक नियुक्तियाँ दी जायेंगी। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 72 में संशोधन किया जा रहा है। शासन स्तर पर स्वीकृति प्राप्त हो गयी है।

इस व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। रिक्त पदों पर अधिकारी उपलब्ध हो जाने से विवेचकों की संख्या बढ़ जायेगी और पुलिस की व्यवसायिक दक्षता में भी बढ़ोत्तरी होगी।

डॉ. राजौरा ने बताया है कि मध्यप्रदेश पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 72 में संशोधन कर जहाँ रिक्तियों को तत्काल भरने की आवश्यकता है और फीडर पद पर उपयुक्त शासकीय सेवक उपलब्ध है, ऐसी दशा में उच्चतर पद पर कार्यवाहक नियुक्ति दी जायेगी। उच्चतर पद पर कार्य करने वाले ऐसे शासकीय सेवक उच्चतर पद की समस्त शक्तियों/अधिकार का निर्वहन कर सकेंगे, जो उच्चतर पद पर पदोन्नत अधिकारियों द्वारा प्रयोग किये जाते हैं। उच्चतर पद पर कार्य करने वाले अधिकारी द्वारा वरिष्ठता का दावा और कोई अतिरिक्त वेतनमान या भुगतान का दावा भी नहीं किया जा सकेगा। उच्चतर पद पर कार्य वहन के दौरान संबंधित अधिकारी-कर्मचारी अपनी वर्दी पर उच्चतर पद का रैंक धारण कर सकेंगे। सभी स्तर के पात्र पुलिस अधिकारियों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार समयमान वेतनमान (प्रथम/द्वितीय/तृतीय) का यथावत लाभ मिलता रहेगा।

पुलिस महानिरीक्षक उप निरीक्षक को निरीक्षक के रूप में, उप महानिरीक्षक सहायक निरीक्षक को उप निरीक्षक के रूप में एवं पुलिस अधीक्षक आरक्षक को प्रधान आरक्षक के रूप में आगामी आदेश तक कार्य करने के लिये आदेशित कर सकते हैं। उच्चतर पद पर कार्य करने संबंधी आदेश कभी भी बिना कारण बताये, बिना पूर्व सूचना के वापस किये जा सकते हैं।

डॉ. राजौरा ने बताया है कि उच्चतर पद पर कार्य वहन करने के लिये दायित्व सौंपने से आपराधिक प्रकरणों की विवेचना में हो रही कठिनाइयाँ दूर होंगी। पर्यवेक्षण की कमी दूर होगी। उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार और उच्च रैंक की वर्दी धारण करने का अधिकार मिल जाने से पदोन्नति संबंधी पुलिस अधिकारियों का संतुष्टि स्तर बढ़ेगा। विभागीय दक्षता भी बढ़ेगी। उच्चतर पद पर कार्यवाहक प्रभार देने से शासन पर कोई वित्तीय भार भी नहीं आयेगा।

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