मड़वास वितरण केंद्र में 24 करोड़ रुपए बिजली बिल बकाया, कनिष्ठ अभियंता ने बिल जमा करने उपभोक्ताओं से की अपील
रवि शुक्ला,सीधी
मड़वास क्षेत्र में कुछ उपभोक्ताओं का नया फॉर्मूला चल पड़ा है—
पंखा 24 घंटे चलेगा, एसी ठंडा रहेगा, मोबाइल चार्ज फुल रहेगा… लेकिन बिल? वो तो जैसे कोई “ऑप्शनल सब्जेक्ट” हो गया है!
मीटर तेजी से भाग रहा है, लेकिन उपभोक्ता कह रहे हैं—
“अभी टाइम नहीं है, अगली बार देखेंगे…”
ऐसा लगता है जैसे बिजली विभाग कोई दोस्त हो, जो उधार में भी मुस्कुरा कर सेवा देता रहे!
कुछ लोग तो इतने आत्मविश्वासी हैं कि मानो बिजली फ्री स्कीम में आई हो—
“पहले इस्तेमाल करो, भुगतान का मूड आए तो सोचेंगे!”
बिल जमा करने की आखिरी तारीख गुजर जाती है, विभाग बिल जमा करने कहे फिर भी जवाब तैयार— “अभी समय नहीं मिला”, “अगले महीने देंगे”, या फिर क्लासिक डायलॉग— “सरकार माफ कर देगी”.
लगता है जैसे बिजली नहीं, उधारी पर जिंदगी चल रही हो! लेकिन भूल जाते हैं कि जब लाइन कटती है, तब सबसे पहले यही लोग विभाग को कोसते नजर आते हैं— “बिना बताए लाइट काट दी!” सच तो यह है कि बिजली का उपयोग “VIP सुविधा” की तरह और भुगतान “ऑप्शनल” समझ लिया गया है.लेकिन सच्चाई ये है कि अगर यही हाल रहा, तो एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब
बिजली खुद कहे— “अब मैं भी छुट्टी पर जा रही हूं!”
क्या है पूरी खबर
मड़वास वितरण केंद्र अंतर्गत बिजली विभाग को भारी राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र में उपभोक्ताओं द्वारा समय पर बिजली बिल जमा न करने के कारण बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार वर्तमान में करीब 24 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है.यह स्थिति बिजली व्यवस्था के संचालन और रखरखाव के लिए चुनौती बनती जा रही है.
इस संबंध में राजेंद्र सिंह राजपूत (कनिष्ठ अभियंता) ने उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग समय पर अपने बिजली बिल का भुगतान करें, ताकि विद्युत सेवाएं सुचारू रूप से जारी रह सकें.
उन्होंने कहा कि लगातार बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है, जिसमें कनेक्शन काटना शामिल है.
विभाग ने साफ किया है कि समय पर बिल भुगतान से ही क्षेत्र में बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।

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