मझौली:आदिवासी सरपंच ने जनसुनवाई में की शिकायत, भ्रष्टाचार और लापरवाह रोजगार सहायक पर नहीं हुई कार्यवाही
सीधी।
जिले की मझौली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत छुही में पदस्थ रोजगार सहायक नितेश कुमार पाण्डेय के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। आदिवासी सरपंच ने सीधी जनसुनवाई में पिछले मंगलवार 5 मई को आवेदन देकर उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी , लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इससे पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
जनसुनवाई में हुई शिकायत
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार सरपंच द्वारा दिए गए आवेदन में बताया गया कि रोजगार सहायक नितेश कुमार पाण्डेय ग्राम पंचायत में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते वे फोन के माध्यम से सूचना देकर ग्रामवासियों को बुलाते हैं, लेकिन तय दिन पंचायत में नहीं पहुंचते, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विकास कार्यों में लापरवाही और गुमराह करने के आरोप
सूत्रों ने बताया कि आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 21 अप्रैल 2026 को नाली एवं पुलिया निर्माण का मूल्यांकन किया गया, लेकिन जियो टैगिंग के नाम पर रोजगार सहायक द्वारा बार-बार बहाने बनाए जा रहे हैं, कभी सर्वर डाउन तो कभी पोर्टल बंद होने की बात कहकर कार्य को लंबित रखा जा रहा है।
पहले भी लग चुके हैं भ्रष्टाचार के आरोप
सूत्रों के अनुसार, सरपंच आवेदन में यह उल्लेख किया है कि नितेश पाण्डेय पूर्व में खंतरा और बोदारी पंचायत में भी पदस्थ रह चुके हैं, जहां उन पर वसूली और कमीशनखोरी के आरोप लगे थे, बोदारी टोला के जन चौपाल में भी कलेक्टर से शिकायत की गई थी, जहां कार्रवाई और एफआईआर दर्ज के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ।
फोन तक नहीं उठाते रोजगार सहायक
आवेदन में सरपंच ने लिखा की सरपंच और सचिव का रोजगार सहायक न तो फोन रिसीव करते हैं और न ही किसी प्रकार का जवाब देते हैं.इससे हितग्राही मूलक योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
सरपंच की मांग: हटाया जाए रोजगार सहायक
सरपंच ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से मांग की है कि नितेश कुमार पाण्डेय को ग्राम पंचायत छुही से हटाया जाए, ताकि पंचायत में योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके और ग्रामीणों को राहत मिल सके।
बड़ा सवाल: कार्रवाई क्यों नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित रोजगार सहायक पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। क्या उन्हें किसी का संरक्षण प्राप्त है या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं?
मामला जो कुछ भी हो यह जांच का विषय है लेकिन अब देखना होगा कि खबर के प्रकाशन के बाद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पंचायत के ग्रामीणों को कब न्याय मिल पाता है।
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