मझौली महाविद्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप: 15 लाख के कार्यों में निविदा प्रक्रिया दरकिनार करने का दावा
रवि शुक्ला,मझौली।
शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय मझौली में निर्माण एवं अन्य कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के कथित फर्जी खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती गीता भारती और संबंधित जिम्मेदारों पर आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराए गए और राशि का दुरुपयोग किया गया।
Majhouli college
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, महाविद्यालय में कई ऐसे कार्य कराए गए जिनकी लागत लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक दिखाई गई, जबकि वही कार्य करीब एक लाख रुपये में पूरे हो सकते थे। आरोप है कि इन कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर कराया गया, ताकि निर्धारित निविदा प्रक्रिया से बचा जा सके। ऐसे विभिन्न कार्यों पर कुल मिलाकर लगभग 15 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है।
निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्धारित सीमा से अधिक के कार्यों के लिए आवश्यक सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई कार्यों की न तो अखबारों में निविदा सूचना प्रकाशित की गई और न ही ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी तरीके से टेंडर आमंत्रित किए गए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि लाखों रुपये के कार्य किस आधार पर और किन लोगों को दिए गए।
रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यादेश, प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति, निविदा दस्तावेज, तुलनात्मक पत्रक, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच के साथ-साथ मौके पर कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
एक ही कार्य का रिकॉर्ड उपलब्ध
जब इस संबंध में प्राचार्य श्रीमती गीता भारती से जानकारी ली गई, तो उन्होंने केवल एक कार्य की निविदा से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की बात कही। अन्य कार्यों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान प्रक्रिया में चूक होने की बात भी सामने आई है।
चार वर्षों से चल रहा है मामला?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रकार की अनियमितताओं का सिलसिला पिछले करीब चार वर्षों से जारी है। जनभागीदारी शाखा के प्रभारी लिपिक बाबूलाल सिंह आयाम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कार्यों की वास्तविक लागत से अधिक भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है और संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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