नाले के नाम पर लीज और नदी से रेत उत्खनन,संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बनास नदी से मशीनों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन

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नाले के नाम पर लीज और नदी से रेत उत्खनन,संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बनास नदी से मशीनों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन



नाले के नाम पर लीज और नदी से रेत उत्खनन,संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बनास नदी से मशीनों द्वारा रेत का अवैध उत्खनन



(आर.बी.सिंह,राज) सीधी।

केंद्र सरकार द्वारा संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सीमा निर्धारण कर उसके लिए वन संपदा एवं वन्य प्राणी संरक्षण और संवर्धन के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं जिसके तहत रिजर्व क्षेत्र से किसी भी तरह  की वन संपदा एवं वन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं विभाग द्वारा रखरखाव के लिए सुरक्षा श्रमिक से लेकर वनरक्षक,सहायक परिक्षेत्र अधिकारी एवं परिक्षेत्र अधिकारी के साथ-साथ अनुविभागीय  अधिकारी जैसे पद पर नियुक्ति कर जिम्मेदारी दी गई है इसके साथ ही सेटेलाइट के जरिए भी सतत निगरानी का प्रावधान किया गया है।
 बावजूद इसके बड़ी मात्रा में संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बनास नदी से अवैध तरीके से जेसीबी मशीनों द्वारा रेत उत्खनन एवं परिवहन हाइवा ट्रकों के द्वारा दिन-रात किया जा रहा है जिसमें विभाग की मूक सहमति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहडोल जिले के व्यौहारी तहसील क्षेत्र अंतर्गत बोड्डीहा ग्राम के एक नाले के नाम पर रेत उत्खनन के लिए स्वीकृति जारी की गई है जबकि लीज धारक द्वारा संजय टाइगर रिजर्व सीधी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में बह रही बनास नदी पर चार जेसीबी मशीन के द्वारा दिन-रात उत्खनन कर हजारों हाइवा वाहनों से रोज रेत की निकासी की जाती है।

टाइगर रिजर्व पर सवालिया निशान

इस तरह के अवैध रेत उत्खनन के मामलों की संजय टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद भी  उनका मौन रहने से ये साबित होता है कि यह सारा कारोबार संजय टाइगर रिजर्व सीधी के आला अधिकारियों की मिली भगत के द्वारा ही किया जाता है अन्यथा छोटे-मोटे वाहनों में परिवहन करते पाए जाने पर गंभीर अपराध कायम किया जाता है फिर वही नियम ऐसे बड़े माफियाओं के लिए शिथिल हो जाता है जो बड़ा सवाल है?

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