ठेकेदारी में PM आवास का घटिया निर्माण , 8 साल में आवास खंडहर, क्या सत्तापक्ष के नेताओं का बकवा रोजगार सहायक को मिल रहा संरक्षण
रवि शुक्ला,सीधी
केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा है कि सरकार की सभी योजनाएं सभी पात्र लोगों के पास पहुंचे और उनका लाभ मिल सके केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना पात्र हितग्राहियों को देने की योजना है सभी पंचायत में यह नियम है कि जिसके पास कच्चा मकान हो उसे आवास का पक्का मकान मिले और सरपंच, सचिव ,रोजगार सहायक की जिम्मेदारी भी है वही मझौली जनपद के कुछ पंचायतों में पात्रों को तो बाद में लेकिन जो अपात्र है उन्हें पहले आवास दे दिया जाता है आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में लोगों को और बड़ी समस्या हो रही जो गरीब है,कुछ पंचायत में कुछ वर्ष पहले पंचायत के सरपंच सचिव ठेकेदारी से हितग्राहियों का आवास का घटिया निर्माण करा राशि का बंदबाट कर लिए अब आवास में रहने लायक नहीं है,जहां लोग गौ वंश को बांधने लगे कुछ तो खंडहर हो गए वहां जबसे बना लोग रहे ही नहीं.
ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत बकवा का आया है जहां 2016 - 2017 में लगभग जितने भी आवास का निर्माण कराया गया है इतना घटिया बनया गया है कि बरसात में टपकते हैं वहां रहने लायक नहीं वहीं पंचायत के रोजगार सहायक द्वारा कराया गया जो अब वहां हितग्राही तो नहीं वहां मवेशियों को रखा जाता है, ग्रामीण ने बताया की आवास बहुत घटिया बनाया गया है बरसात में पानी टपकता है गिरने का डर बना रहता है इसलिए वहां नहीं रहते मवेशी बांधते हैं. वहीं एक आवास का निरीक्षण करने मीडिया पहुंची जहां वहीं पर एक ग्रामीण भी शिकयत करने के मौजूद था मीडिया की भनक लगते ही वहीं पर रोजगार सहायक रामसत्य यादव पहुंच वहां मौजूद ग्रामीण को धमकी देने लगे की क्यों शिकायत कर रहे हो जब मीडिया का कैमरा देखे तो बाइक से भाग खड़े हुए ऐसा लगता है की रोजगार सहायक जिनको 10 वर्षों से वित्तीय प्रभार में हैं दबंग और गुंडगार्डी भी करते होंगे.
सूत्रों ने बताया कि राम सत्य यादव 10 वर्षों से वित्तीय प्रभार पर हैं जब इनका ट्रांसफर होता है तो नेताओं से तालमेल कर अपना ट्रांसफर भी रोकवा लेते हैं सूत्रों की माने तो रामसत्य यादव अपने मन मुताबिक रामराज कोल को सचिव लाए ताकि वित्तीय प्रभार न मिले और हम जमकर मलाई खाएं.
सत्तापक्ष के नेताओं का मिल रहा संरक्षण
सूत्रों के मुताबिक ग्राम पंचायत बकवा के रोजगार सहायक रामसत्य यादव को सत्ता पक्ष के क्षेत्रीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त है इसलिए उनका ट्रांसफर नहीं हो पाता अगर हो भी गया तो अपना ट्रासफर रोकवा लेते हैं और वह अपने मन मुताबिक सचिव को प्रभार दिलवा पंचायत में लाते हैं और सचिव भी ऐसा लाए हैं जिनको वित्तीय प्रभार नही मिले, सूत्रों की माने तो रामसत्य यादव 10 वर्षों से वित्तीय प्रभार पर जमकर मलाई खा रहे हैं. सूत्रों ने बताया की इसके पूर्व पंचवर्षीय में पीएम आवास के नाम पर आदिवासियों से लिस्ट में नाम जोड़ने से लेकर आवास बनाने तक का ठेका लेते थे और लोगों का घटिया निर्माण कराया जहां घर में रहने लायक नहीं है वहां मवेशियों को रखा जाता है।
कौन है रामसत्य यादव
ग्राम पंचायत रोजगार सहायक रामसत्य यादव क्या इतना सरहंग और दमदार है की न तो इनका ट्रांसफर हो रहा है और न ही कोई कार्यवाही हो रही है जानकारी तो यह भी मिल रही है यह पंचायत में कभी नहीं जाते और जनता का कोई काम करते हैं, अब सवाल यह उठता है की एक रोजगार सहायक इतना दबंग है कि इसका ट्रासफर हो गया तो सत्ता पक्ष के नेताओं से मिलकर अपना ट्रांसफर रोकवा लेता है,न तो इसको कार्यवाही का डर है और न ही किसी की हिम्मत पड़ती की इस पर कोई कार्यवाही कर सके, मामला चाहे जो कुछ भी यह जांच का विषय है अब देखन यह होगा जिम्मेदारों द्वारा क्या कुछ कार्यवाही की जाएगी।

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