नेबूहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर, शिविर के दौरान कलेक्टर से हुई थी शिकायत , जांच करने पहुंची टीम

Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

नेबूहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर, शिविर के दौरान कलेक्टर से हुई थी शिकायत , जांच करने पहुंची टीम



नेबूहा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर, शिविर के दौरान कलेक्टर से हुई थी शिकायत , जांच करने पहुंची टीम


रवि शुक्ला,सीधी

नेबूहा ग्राम पंचायत इन दिनों विकास का नया मॉडल पेश कर रही है—यहां काम दिखे या न दिखे, लेकिन कागज़ों में सब कुछ चमकता हुआ नजर आता है। पुलिया बनती है, मगर सिर्फ फाइलों में; सड़कें बनती हैं, लेकिन सिर्फ बिल-वाउचर में; और पैसा बहता है, मगर सीधे खातों में।
ग्रामीणों की शिकायतें भी अब शायद सरकारी फाइलों की तरह हो गई हैं—जमा होती रहती हैं, लेकिन खुलती कम ही हैं। जांच की प्रक्रिया भी बड़ी दिलचस्प है—पहले सूचना पहुंचती है, फिर “तैयारी” होती है, और अंत में सब कुछ “ठीक” मिल जाता है।
आदिवासी महिला सरपंच के नाम पर खेल खेला जा रहा है, और असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे से पूरा मैच नियंत्रित कर रहे हैं विकास कार्यों की गुणवत्ता इतनी शानदार है कि काम शुरू होने से पहले ही भुगतान पूरा हो जाता है—शायद इसे ही ‘एडवांस विकास मॉडल’ कहा जाएगा।
जनपद पंचायत की हालत भी किसी बिना कप्तान की नाव जैसी है—सीईओ का पद खाली है और जिम्मेदारी प्रभारियों के भरोसे ऐसे में अगर भ्रष्टाचार “आत्मनिर्भर” हो गया है, तो इसमें हैरानी कैसी?
यह व्यंग्य लेख ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों के शिकायत के अनुसार लिखी गई है

यह है पूरी खबर 

मझौली जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नेबूहा में बीते दो-तीन वर्षों से विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पंचायत के अधिकांश निर्माण कार्य पंचायती ठेकेदारों को सौंप दिए गए हैं, जहां फर्जी बिल-वाउचर के माध्यम से राशि आहरित कर ली जाती है, जबकि कार्य धरातल पर अधूरे या शुरू ही नहीं होते।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2021-22 के कई निर्माण कार्य आज तक अधूरे पड़े हैं, जबकि उनकी पूरी राशि निकाली जा चुकी है। वर्तमान में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। आरोप है कि आदिवासी महिला सरपंच का फायदा उठाकर पंचायत सचिव और संविदाकार मिलकर अनियमितताओं को अंजाम दे रहे हैं।

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की जा रही है। 18 अप्रैल को कलेक्टर के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज जनप्रतिनिधियों ने जनसुनवाई में पहुंचकर पुनः जांच की मांग उठाई है।

उप सरपंच सुंदर लाल सिंह ने बताया कि इस पंचवर्षीय कार्यकाल में ग्राम विकास की राशि जिस स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिया निर्माण के नाम पर लाखों रुपये आहरित कर लिए गए, लेकिन कार्य शुरू नहीं कराया गया। शिकायत के बाद अब बिना लेआउट के ही मशीनों से खुदाई कर जल्दबाजी में निर्माण कराया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों के बाद संबंधित लोगों को पहले ही सूचना दे दी जाती है, जिससे वे औपचारिकता पूरी कर जांच को प्रभावित करते हैं। मामले को लेकर एसडीएम द्वारा जल्द जांच का आश्वासन दिया गया है।


प्रभारियों के भरोसे चल रही जनपद पंचायत

मझौली जनपद पंचायत की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। पिछले दो-तीन वर्षों से जनपद पंचायत में स्थायी सीईओ की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे पूरा प्रशासन प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। आरोप है कि इस दौरान क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन उस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं 18 अप्रैल के बाद जिस अधिकारी को नेबूहा पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई, वह भी अब तक क्षेत्र में सक्रिय नजर नहीं आई हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार कल ही जिला स्तर से जांच टीम गांव पहुंची थी, जहां कुछ कार्यों की जांच की गई। हालांकि जांच में क्या सामने आया है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ