ग्राम पंचायत गोतरा में भ्रष्टाचार का जांच में खुलासा: सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई,फर्जी बिल, डबल भुगतान और बिना कार्य कराए राशि का किया गया आहरण

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ग्राम पंचायत गोतरा में भ्रष्टाचार का जांच में खुलासा: सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई,फर्जी बिल, डबल भुगतान और बिना कार्य कराए राशि का किया गया आहरण


ग्राम पंचायत गोतरा में भ्रष्टाचार का जांच में खुलासा: सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई

फर्जी बिल, डबल भुगतान और बिना कार्य कराए राशि का किया गया आहरण 


रवि शुक्ला,सीधी
सीधी जिले की ग्राम पंचायत गोतरा में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत पर कलेक्टर ने संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित की थी। जांच के दौरान कई निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर सचिव रवींद्र कुमार यादव और ग्राम रोजगार सहायक राज कुमार मिश्रा को ग्राम पंचायत से हटाकर जनपद पंचायत कुसमी में अटैच कर दिया गया है।

जिला पंचायत सीधी के पत्र क्रमांक 4130/जि.पं./जीआरएस स्था./2026 एवं 4128/जि.पं./सचिव स्था./2026 के अनुसार, 21 मई 2026 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। शिकायत में आरोप था कि पंचायत द्वारा बिना कार्य कराए फर्जी बिल-वाउचर और मस्टररोल के माध्यम से राशि आहरित की गई।

जांच टीम ने 19 मई 2026 को स्थल निरीक्षण किया, जिसमें डगपौण्ड और परकुलेशन टैंक निर्माण कार्य तो पाए गए, लेकिन अन्य कई मामलों में गड़बड़ी सामने आई। विशेष रूप से स्टाप डैम निर्माण कार्यों में जल संसाधन विभाग द्वारा पहले ही कार्य पूर्ण और भुगतान किए जाने के बावजूद, पंचायत द्वारा उन्हीं कार्यों को नए नाम से स्वीकृत कर मनरेगा पोर्टल पर फर्जी वाउचर के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया।

इसी तरह पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में भी एक ही कार्य को दो अलग-अलग योजनाओं (मनरेगा और पांचवां वित्त आयोग) के तहत दिखाकर करीब 8.20 लाख रुपये का भुगतान बिना कार्य कराए निकालने का मामला सामने आया। देवी मंदिर परिसर के समतलीकरण कार्य में भी दोहरी राशि आहरित करने की शिकायत सही पाई गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पंचायत के पास किसी भी कार्य से संबंधित जरूरी दस्तावेज, जैसे तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति और भुगतान रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। इसे अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता माना है।
परियोजना अधिकारी मनरेगा, जिला पंचायत सीधी द्वारा सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और भी कार्रवाई संभव है।
वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं को नहीं बुलाया जाता, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में जांच के समय शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

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