बोदारी टोला रोजगार सहायक की जांच ठंडे बस्ते में, सीधी कलेक्टर जांच कर FIR दर्ज करने दिए थे निर्देश
आवास राशि गबन की शिकायत सही मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं, प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल
सीधी जिले के मझौली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बोदारी टोला में रोजगार सहायक नीतेश कुमार पांडेय के खिलाफ गंभीर शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जन चौपाल के दौरान बोदारी टोला निवासी श्री प्रसाद साकेत ने आवास योजना की राशि निकाले जाने को लेकर सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप था कि बिना आवास निर्माण किए ही राशि निकाल ली गई, जिसमें रोजगार सहायक की मिलीभगत बताई गई.
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसडीएम द्वारा चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, जिसने मौके पर पहुंचकर जांच भी की। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच में शिकायत सही पाई गई है, लेकिन इसके बावजूद आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही कोई विभागीय कार्रवाई सामने आई है।
मिली जानकारी अनुसार जांच कार्यवाही की फाइल पीएम आवास प्रभारी श्रीनिवास साकेत के पास धूल खा रही.
मीडिया द्वारा जब इस मामले में जनपद पंचायत के जांच टीम में शामिल कर्मचारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल किया गया। वहीं जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरभि श्रीवास्तव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इस पूरे मामले को लेकर अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि शिकायत सही पाए जाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। क्या संबंधित रोजगार सहायक अधिकारियों पर भारी पड़ रहे हैं या फिर किसी प्रकार की साठगांठ या लेन-देन के चलते मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि नीतेश पांडेय को छुहि पंचायत से अनुपम नापित को हटाकर अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, जिसके बाद से वहां भी वे लगातार विवादों में बने हुए हैं। इसी महीने सरपंच द्वारा सीधी में आयोजित जनसुनवाई में उनके खिलाफ लिखित शिकायत भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई सुधार या कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। मामले को लेकर अभी विभागीय आदेश नहीं मिला है की क्या कार्यवाही हुई.
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला यूं ही ठंडे बस्ते में दबा रहेगा।

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