मझौली में मनरेगा ऐप में सेंध: 3500 रु. महीना में बिका क्लोन ऐप, फर्जी हाजिरी से राशि निकासी का किया जा रहा दावा
सीधी/मझौली।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में साइबर सेंधमारी का दावा किया जा रहा है,मजदूरों की उपस्थिति में पारदर्शिता लाने के लिए लागू नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप को हैक कर उसका क्लोन वर्जन तैयार कर लिया गया है। दावा है कि यह क्लोन ऐप देशभर में करीब 3500 रुपए प्रतिमाह में बेचा जा रहा है और इसके जरिए फर्जी हाजिरी भरकर राशि निकाली जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में मुरैना जिले की तीन पंचायतों में इस क्लोन ऐप के जरिए फर्जी हाजिरी का खुलासा हुआ था, जिस पर कार्रवाई भी की गई। अब इसी तरह के आरोप मझौली जनपद क्षेत्र की कुछ पंचायतों पर भी लग रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर एक पंचायत कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर दावा किया है कि क्षेत्र की कई पंचायतों में इस क्लोन ऐप का इस्तेमाल कर मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकाला गया है। इसके समर्थन में वेज लिस्ट भी साझा किए जाने की बात सामने आई है। वहीं एक और पंचायत कर्मचारी से असली और नकली वेज लिस्ट के बारे बातचीत की गई तो बताया कि अगर वेज लिस्ट के अटेंडेंस By वाले में अगर हस्ताक्षर नहीं है तो फर्जी है अगर हस्ताक्षर है तो असली है, हालांकि सच्चाई क्या है यह तो जांच का विषय है।
कैसे काम करता है क्लोन ऐप
जानकारी के मुताबिक, असली NMMS ऐप में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए:
फेस रीडिंग (Face Recognition),जिओ टैगिंग (Location Tracking) समय आधारित उपस्थिति प्रणाली का उपयोग होता है।
लेकिन क्लोन या मोडिफाइड ऐप:किसी भी समय और स्थान से फोटो अपलोड कर देता है,जिओ लोकेशन को मनमाने तरीके से सेट कर देता है,फर्जी फोटो को भी असली पोर्टल पर सेव कर देता है,तय समय (सुबह 8 से दोपहर 3 बजे) के बाद भी उपस्थिति अपडेट कर देता है
मामला जो कुछ भी हो यह जांच का विषय है यदि मझौली क्षेत्र में इस तरह की गड़बड़ी हुई है, तो यह सरकारी धन के बड़े दुरुपयोग का मामला हो सकता है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

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