कछुआ चाल से चल रहा मझौली का विकास: स्कूल भवन और बायपास निर्माण से छात्र परेशान, हादसे का बढ़ा खतरा

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कछुआ चाल से चल रहा मझौली का विकास: स्कूल भवन और बायपास निर्माण से छात्र परेशान, हादसे का बढ़ा खतरा


कछुआ चाल से चल रहा मझौली का विकास: स्कूल भवन और बायपास निर्माण से छात्र परेशान, हादसे का बढ़ा खतरा


रवि शुक्ला,मझौली

सीधी जिले के मझौली उपखंड में विकास कार्यों की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। निर्माणाधीन शासकीय सांदीपनि (सीएम राइज) उच्चतर उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय भवन और बायपास रोड का काम पिछले चार वर्षों से कछुआ चाल से चल रहा है। स्थिति यह है कि निर्धारित 12 से 18 माह की समय-सीमा बीतने के बावजूद अब तक आधा कार्य भी पूरा नहीं हो सका है।
निर्माण स्थल के आसपास पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उड़ती धूल, बिखरी गिट्टी, जगह-जगह खुदे गड्ढे और लगातार चल रहे निर्माण कार्य का शोर पढ़ाई में बाधा बन रहा है। साथ ही, इन परिस्थितियों का बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, पहले यह तय किया गया था कि एक हिस्से का निर्माण पूरा कर उसे शैक्षणिक कार्य के लिए सौंपा जाएगा, उसके बाद ही अन्य हिस्सों का काम शुरू होगा। लेकिन संविदाकार द्वारा मनमाने तरीके से भवन के अलग-अलग हिस्सों को तोड़कर कार्य किया जा रहा है, जिससे कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसी तरह, बायपास रोड का निर्माण कार्य भी बेहद धीमी गति से किया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सड़क पर उखड़ी गिट्टी और धूल से न केवल आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि पिछले एक महीने से बायपास रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर खुले छोड़ दिए गए हैं। न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं और न ही चेतावनी संकेत लगाए गए हैं। यही हाल विद्यालय परिसर का भी है, जहां गहरी खाइयां खोदकर छोड़ दी गई हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। स्थानीय लोगों, अभिभावकों और शिक्षकों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग से प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का नियमित आवागमन होता है, इसके बावजूद समस्या की अनदेखी की जा रही है।

कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर


अप्रैल 2026 में कलेक्टर विकास मिश्रा ने मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और स्थल पर उपस्थित रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, न तो कार्य में गति आई और न ही अधिकारियों की सक्रियता नजर आई। संविदाकार अब भी मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक मझौली के छात्र-छात्राओं और आम नागरिकों को इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा, और क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

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