रोजगार सहायक जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं, SDM दे चुके हैं निर्देश, री-जांच के बहाने मामले को दबाने की कोशिश

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रोजगार सहायक जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं, SDM दे चुके हैं निर्देश, री-जांच के बहाने मामले को दबाने की कोशिश


रोजगार सहायक जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं, SDM दे चुके हैं निर्देश, री-जांच के बहाने मामले को दबाने की कोशिश


रवि शुक्ला,मझौली
मझौली जनपद की ग्राम पंचायत बोदारी टोला में रोजगार सहायक नीतेश पांडेय पर लगे गंभीर आरोपों की जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद भी न तो एफआईआर दर्ज की गई है और न ही जिम्मेदारों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, मझौली एसडीएम आर.पी. त्रिपाठी ने कलेक्टर के निर्देश पर 9 अप्रैल 2026 को एक जांच टीम गठित की थी। इस टीम में खंड पंचायत अधिकारी रोशनलाल गुप्ता, लेखाधिकारी संतोष निगम, पीएम आवास प्रभारी श्रीनिवास साकेत एवं ई-गवर्नेंस अधिकारी विनय मिश्रा शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें रोजगार सहायक को दोषी पाया गया।
इसके बाद एसडीएम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, जिसकी जानकारी एसडीएम ने मीडिया को फोन के माध्यम से भी दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

बिना आवास बने ही निकाल ली राशि

मामले में सामने आया है कि शिकायतकर्ता श्री प्रसाद साकेत का प्रधानमंत्री आवास धरातल पर बना ही नहीं, जबकि कागजों में निर्माण दर्शाकर राशि निकाल ली गई। आरोप है कि कियोस्क संचालक और रोजगार सहायक की मिलीभगत से राशि का आहरण किया गया। हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा कुछ राशि स्वयं निकाले जाने की बात भी सामने आई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना आवास बने गरीब परिवार के खाते से पूरी राशि कैसे निकाली गई।

क्या था पूरा मामला

ग्राम पंचायत बोदारी टोला निवासी श्री प्रसाद साकेत ने 4 अप्रैल 2026 को आयोजित जनशिकायत शिविर में कलेक्टर से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की राशि उनके बैंक खाते से अंगूठा लगवाकर निकाल ली गई। इस गंभीर शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित की थी।

जांच से पहले भी हुआ था कथन बयान

मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि जांच टीम के गठन से पहले ही 8 अप्रैल को कथन बयान ले लिया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल स्थल पंचनामा में कियोस्क संचालक ज्ञानेंद्र पांडेय और मनीष गुप्ता द्वारा 25-25 हजार रुपये निकालने की बात दर्ज है। इस दस्तावेज में पीसीओ और पीएम ए वाय के बीसी,ग्राम पंचायत सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
इसके बावजूद संबंधित कियोस्क संचालकों और रोजगार सहायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

री-जांच के नाम पर टल रही कार्रवाई

जब इस संबंध में सीईओ सुरभि श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोजगार सहायक ने पुनः री-जांच के लिए आवेदन दिया है, जिसके कारण कार्रवाई रुकी हुई है।
इस जवाब के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है या जानबूझकर मामले को दबाया जा रहा है।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

सूत्रों के अनुसार, संबंधित रोजगार सहायक पर पहले भी कई पंचायतों में अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। यदि उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक चुप्पी साधे रहते हैं या इस मामले में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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