कुसमी में अवैध रेत उत्खनन जारी ,गोपद नदी का सीना छलनी कर रहे रेत माफिया, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल
सीधी, रवि शुक्ला
सीधी जिले में भले ही रेत खदानों पर फिलहाल प्रतिबंध लागू हो, लेकिन इसके बावजूद अवैध रेत उत्खनन का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपद नदी के गुड़ूआधार पंचायत का है, जहां रात के अंधेरे में रेत माफिया बेखौफ होकर नदी का दोहन कर रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शाम होते ही रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं और रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों के जरिए नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जाती है। निकाली गई रेत को नदी किनारे ही डंप कर दिया जाता है, जिसे बाद में जेसीबी मशीनों की मदद से लोड कर बाजार में खपाया जाता है। बताया जा रहा है कि रोजाना दर्जनों वाहन इस अवैध कार्य में लगे हुए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे खेल में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। उनका कहना है कि जब भी पुलिस की गाड़ी आती है, तो मेन रोड से सायरन बजाया जाता है, जिससे रेत माफिया पहले ही सतर्क होकर मौके से फरार हो जाते हैं। कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है।
स्थिति यह है कि गोपद नदी के कई हिस्सों में सैकड़ों ट्रॉली रेत डंप किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
इस मामले में कुसमी थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी से जब चर्चा की गई, तो उन्होंने जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि “इस संबंध में हमें कोई सूचना नहीं है। 30 जून को जन चौपाल कार्यक्रम भी किया गया था, लेकिन ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई। आप फोटो भेज दीजिए, देखकर खनिज विभाग से बात करेंगे।” वहीं स्टेटमेंट देने के सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वे रेत माफियाओं का विरोध करते हैं, तो उन्हें धमकी भरे लहजे में जवाब दिया जाता है कि “यह सरकारी रेत है, तुम लोगों का कोई नुकसान नहीं हो रहा, तुमसे मतलब नहीं है।”
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल प्राकृतिक संसाधनों की भारी क्षति होगी, बल्कि आने वाले समय में इसका पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

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