Petrol - Diesel News: कच्चा तेल सस्ता, फिर भी क्यों महंगा है पेट्रोल-डीजल: सरकार ने बताया कब मिल सकती है राहत
नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल जस की तस बनी हुई हैं। इससे आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है तो ईंधन के दाम क्यों नहीं घटाए जा रहे हैं।
दरअसल, फरवरी के अंत से जून के पहले सप्ताह तक ईरान-यूएस तनाव के चलते वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बाधित हो गया था, जिससे कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
कच्चा तेल सस्ता, फिर भी राहत नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 71 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई हैं। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई कमी नहीं की गई है, जबकि कई पड़ोसी देशों में कीमतें घटा दी गई हैं।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत में ईंधन की कीमतें तुरंत कम नहीं की जा सकतीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो पेट्रोल-डीजल बेचा जा रहा है, वह उस कच्चे तेल से तैयार हुआ है जिसे करीब दो महीने पहले ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।
उनके मुताबिक,कच्चे तेल की खरीद, परिवहन,और रिफाइनिंग इन सभी प्रक्रियाओं में समय लगता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर खुदरा स्तर पर देर से दिखाई देता है।
कीमतें घटने में क्यों लगेगा समय?
सरकार का कहना है कि जब तक महंगे दाम पर खरीदा गया पुराना स्टॉक खत्म नहीं हो जाता, तब तक कीमतों में कमी संभव नहीं है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने में करीब दो महीने तक का समय लग सकता है।
चुनाव और कीमतों का गणित
जानकारों के मुताबिक, जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हुआ था, तब भारत में तुरंत कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं। उस समय कई राज्यों में चुनाव थे, इसलिए सरकार ने जनता पर बोझ डालने से बचा। बाद में कीमतों में बढ़ोतरी की गई, जिससे अब उस संतुलन को बनाए रखना भी एक कारण माना जा रहा है।
पड़ोसी देशों में तुरंत राहत क्यों?
भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और भूटान में सरकारों ने कच्चे तेल की कीमत बढ़ते ही उसका पूरा बोझ जनता पर डाल दिया था। यही वजह है कि अब जब कीमतें घटीं तो वहां तुरंत राहत दे दी गई।
कब मिलेगी सस्ती कीमतों की राहत?
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिए हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो सरकार हर 10–15 दिन में समीक्षा करेगी। आने वाले हफ्तों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है और धीरे-धीरे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष:
कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल राहत संभव नहीं है। पुराना स्टॉक, लॉजिस्टिक्स और सरकारी संतुलन नीति इसके मुख्य कारण हैं। हालांकि, अगर वैश्विक कीमतें स्थिर रहीं, तो आने वाले समय में आम जनता को राहत मिल सकती है।
Author:Ravi Shukla

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