मझौली जनपद क्षेत्र में भ्रष्टाचार का जाल: कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल


रवि शुक्ला,मझौली
मझौली जनपद क्षेत्र में जहां सड़कें बनने से पहले ही टूटने लगती हैं और जांच शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाती है। यहां “काम” कम और “कागज” ज्यादा चलते हैं। जांच टीम बनाना यहां किसी त्योहार से कम नहीं। टीम बनती है, फाइल सजती है, चाय-नाश्ता होता है… और फिर फाइल आराम से अलमारी में विश्राम करने चली जाती है। मौके पर जाना? वो तो पुराने जमाने की परंपरा है! यहां के निर्माण कार्य भी बड़े अनोखे हैं—सड़कें इतनी संवेदनशील हैं कि एक महीने में ही “भावुक” होकर उखड़ जाती हैं। पुल और भवन भी मानो कह रहे हों—“हम ज्यादा दिन टिकने के लिए नहीं बने!”धुंधले बिलों का तो कहना ही क्या! जितना धुंधला बिल, उतना साफ भुगतान। लगता है पारदर्शिता का नया फॉर्मूला यही है—कम दिखे, ज्यादा निकले।और अगर कहीं शिकायत हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं। जांच टीम गठित हो जाएगी। फिर वही पुराना खेल—“देखेंगे, सोचेंगे, करेंगे”… और अंत में सब शांत। कहते हैं यहां कुछ कामों का “रेट कार्ड” भी तय है। मतलब विकास कार्यों से पहले ही तय हो जाता है कि किसे कितना “विकास” मिलेगा। जनता? वो तो बस दर्शक है—जो हर बार यही सोचती रह जाती है कि असली निर्माण हो रहा है या सिर्फ कागजी। मझौली में सब कुछ चल रहा है—भ्रष्टाचार भी, जांच भी और जीरो टॉलरेंस का दावा भी… बस अगर कुछ नहीं चल रहा, तो वो है असली विकास।

मझौली जनपद क्षेत्र अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में आए दिन भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आते रहते हैं। आए दिन स्थानीय अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई खास असर नहीं दिख रहा। हालात यह हैं कि जांच टीम गठित होने के बाद भी कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जिससे पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले बुलंद हैं। 

जांच के नाम पर औपचारिकता, कार्रवाई शून्य

कई मामलों में जांच टीम का गठन तो किया जाता है, लेकिन या तो अधिकारी मौके पर पहुंचते ही नहीं या फिर औपचारिक जांच कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जांच केवल दिखावे के लिए की जा रही है।

भाजपा सरकार के जीरो टॉलरेंस दावे पर सवाल

प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। आरोप यह भी है कि कुछ पंचायतों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों का प्रभाव है, जिससे अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पाती।

निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता

सड़क, पुल और भवन निर्माण जैसे कार्यों में घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप भी लगते रहे हैं। कई सड़कें निर्माण के एक महीने के भीतर ही उखड़ने लगती हैं, जबकि पक्के निर्माण कार्यों में दरारें पड़ जाती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी गुणवत्ता की अनदेखी कर भुगतान जारी कर देते हैं।

आरईएस विभाग की भूमिका भी सवालों में

ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा (RES) विभाग के कार्यों में भी अनियमितता की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसा लगता कि मूल्यांकन अधिकारी बिना गुणवत्ता जांच के ही निर्माण कार्यों का मूल्यांकन कर राशि आहरित करवा देते हैं, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

मंडल अध्यक्ष की जांच ठंडे बस्ते में

हाल ही में भाजपा मंडल अध्यक्ष रामसजीवन कचेर पर पंचायत कार्यों में हस्तक्षेप और कथित रूप से परिजनों के नाम पर दोहरा लाभ लेने की शिकायत हुई थी। इस मामले में जनपद पंचायत मझौली की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरभि श्रीवास्तव द्वारा तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, लेकिन जांच के नतीजे अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

धुंधले बिलों के जरिए फर्जी भुगतान :

पंचायत दर्पण पोर्टल पर धुंधले और संदिग्ध बिल अपलोड कर राशि आहरित करने की जानकारी मिलती रहती है। बताया जाता है कि इन बिलों का सत्यापन जनपद स्तर पर किया जाता है, जनपद में बैठे अधिकारी आंख मूंदकर बिना ठोस जांच के ही बिल का सत्यापन कर देते हैं। जानकारी तो यह मिलती है कि कुछ कार्यों के कमीशन तय रहते है।

जनता भुगत रही खामियाजा

इन सभी अनियमितताओं का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। विकास कार्यों की गुणवत्ता गिरने से लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं हो रही।

आखिर जिम्मेदार कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मझौली जनपद में बढ़ते भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्यों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों कर्मचारियों क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को एक साथ आना होगा ताकि सरकार कि भ्रष्टाचार वाली जीरो टॉलरेंस वाली नीति सफल हो सके।