सफाई कराये बगैर ही नहर मे छोड़ दिया बरचर बांध का पानी,घास-फूंस झाड़ियों से भरी पटी नहरें, किसानों में जमकर आक्रोश

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सफाई कराये बगैर ही नहर मे छोड़ दिया बरचर बांध का पानी,घास-फूंस झाड़ियों से भरी पटी नहरें, किसानों में जमकर आक्रोश



सफाई कराये बगैर ही नहर मे छोड़ दिया बरचर बांध का पानी,घास-फूंस झाड़ियों से भरी पटी नहरें, किसानों में जमकर आक्रोश

संतोष तिवारी,कुसमी- सरकार द्वारा एक ओर देश के किसानो की सुविधा को देखते हुए गांव गांव तक नहरों का जाल बिछाया गया है किसानों के खेत तक समय पर पानी पहुँचे हर वर्ष नहर की साफ सफाई के लिए करोड़ों अरबों रुपये खर्च कर दिया जाता है। दूसरी ओर सीधी जिले के बरचर बांध में सिचाई विभाग की मनमानी चरम सीमा पर है जहाँ बगैर नहर सफाई के ही नहरों में उगे झाड़ झंखाड़ घास फूस से पटी नहरों में बांध का पानी छोड़ दिया गया हालात यह है कि नहरों की साफ सफाई न होने से नहरों की स्तिथी बदहाल हो गई है बरचर बांध से निकली मेन नहर एवम गांवो की माइनर नहरे झाड़ झंखाड़ से भरे पटे हैं जिसके कारण रबी फसल की बुआई को लेकर किसानों को चिंता सता रही है हालात यह है कि नहर का पानी किसानों के खेतो में पहुचने की बजाय जगह जगह सीपेज कर रहा है पानी नहरों से ऊपर बह रहा है पानी खेतों में छलक रहा है यहां तक कि लोगो के घरों में भी पानी भर रहा है जिससे रामपुर,ददरिहा,पोंड़ी,बजबई,गोतरा,दरीमाडोल के किसानों में जमकर आक्रोश है किसानों का कहना है कि अगर 3 दिवस् के भीतर मेन एवम माइनर नहरों की साफ सफाई नही की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी जवाबदारी बरचर बांध के अधिकारियों की होगी।

शिकायत के बाद भी अफसर मौन

किसानों ने आरोप लगाया है कि कई बार सिचाई विभाग के अफसरों से नहर की साफ सफाई कराने की बात कहे जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहे हैं इससे हम किसानों का सब्र का बांध भी टूट गया है ।

8 लाख बची राशि को खर्च करने में कोताही,महज 8 मजदूरों से कोरम पूर्ती

शासन स्तर से पिछले वर्ष बरचर बांध से लेकर भदौरा निधपुरी गाँव तक कुल 13 किलो मीटर तक नहरो की साफ सफाई एवम मरम्मतीकरण के लिए कुल 42 लाख रुपये की राशि दी गयी थी जिससे 34 लाख रुपये पिछले वर्ष ही मरम्मतीकरण एवम साफ सफाई के नाम पर खर्च कर दिए गए थे लेकिन इसके बावजूद भी 8 लाख की राशि शेष बची हुई थी  समय रहते अगर नहरों की साफ सफाई करा दी जाती तो किसानों को समय पर पानी मिल जाता और रबी सीजन की फसल की बुवाई भी समय पर हो जाती सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कछुआ चाल की गति से औपचारिकता के रूप में महज 8 मजदूरों के भरोसे नहरों की सफाई कराई जा रही है ऐसे में बरचर बांध के किसानों की खेती अब भगवान भरोसे ही रह गई है विभागीय मनमानी से किसानों में जमकर आक्रोश भी देखा जा रहा है।मजे की बात तो यह है कि विभाग के पास 8 लाख की पर्याप्त राशि होने के बाद भी विभागीय अधिकारी बजट का रोना रो रहे है ।


इनका कहना है-

महिपाल प्रजापति किसान(रामपुर)
नहरों की सफाई नही हुई और पानी छोड़ दिया गया वही पानी पूरे नहर के जगह जगहो तक घरों तक सीपेज कर रहा है ऐसे में हम किसानों की खेती चौपट हो जाएगी अगर नहर की सफाई नही हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

चन्द्रशेखर प्रसाद तिवारी-किसान(पोंड़ी)

न तो मेन नहर और न ही माइनर नहरों की कोई भी सफाई नही की गई और पानी छोड़ दिया गया वही पानी नहर से ऊपर बह रहा है जगह जगह सीपेज कर रहा है खेतों में लबालब भर रहा है पलेवा पर पलेवा लग रहा है अगर यही हाल रहा तो आंदोलन किया जाएगा।

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