मड़वास–मझौली थाना क्षेत्र में रेत माफिया बेलगाम, रात भर अवैध उत्खनन से करोड़ों का राजस्व नुकसान
गोपद नदी सहित कई सहायक नदियों में दर्जनों अवैध घाट सक्रिय, प्रशासन की जानकारी के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
रवि शुक्ला,सीधी
सीधी जिले के मड़वास और मझौली थाना क्षेत्र में रेत माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गोपद नदी और उससे जुड़ी सहायक नदियों का सीना छलनी कर दिन-रात अवैध रेत उत्खनन का खेल खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय से लेकर जिला प्रशासन तक को होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
सूत्रों के अनुसार मड़वास थाना क्षेत्र के गोतरा, निधपुरी और टिकरी इलाकों में गोपद नदी के किनारे दर्जनों अवैध घाट बना दिए गए हैं। वहीं मझौली थाना क्षेत्र के सेमरिहा, बोदारी टोला और आसपास के जंगल क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर रेत निकासी जारी है। ट्रैक्टरों के माध्यम से दिन में रेत निकालकर अलग-अलग स्थानों और घरों के भीतर डंप किया जाता है, जहां एक दिन में 20 से 25 ट्रॉली तक अवैध रेत निकासी की जाती है
इसके बाद रात के अंधेरे में जेसीबी की मदद से इस रेत को बड़े डंपर और हाइवा वाहनों में लोड कर दूर-दराज के इलाकों में सप्लाई किया जाता है। बताया जा रहा है कि यह अवैध कारोबार पिछले कई महीनों से लगातार चल रहा है, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम 11 बजे से लेकर सुबह तक अवैध उत्खनन का काम जोरों पर रहता है। कभी-कभी सेटिंग के जरिए दिन में भी ट्रैक्टर थाने के सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगती। गोपद नदी में बने गहरे गड्ढे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पिछले 6 महीनों से यहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है।
हालांकि प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बिना किसी डर के रेत माफिया लगातार सक्रिय हैं।
अब सवाल यह उठता है कि स्वच्छ प्रशासन का दावा करने वाले जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेंगे और प्रभावी कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मुद्दा भी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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