मदद के वादे हवा-हवाई: 10 महीने बाद भी सुविधाओं को तरसता नवीन महाविद्यालय मड़वास

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मदद के वादे हवा-हवाई: 10 महीने बाद भी सुविधाओं को तरसता नवीन महाविद्यालय मड़वास


मदद के वादे हवा-हवाई: 10 महीने बाद भी सुविधाओं को तरसता नवीन महाविद्यालय मड़वास




मझौली
शासकीय नवीन महाविद्यालय मड़वास आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। महाविद्यालय फिलहाल पुराने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी जर्जर स्थिति को देखते हुए पूर्व में मरम्मत कार्य कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकीं।
गौरतलब है कि 30 सितंबर 2025 को महाविद्यालय में तीन कक्षों के जीर्णोद्धार कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं अन्य गणमान्य नागरिकों ने महाविद्यालय के विकास के लिए भवन मरम्मत, फर्नीचर, शौचालय, कार्यालयीन सामग्री सहित कई आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए मदद के नाम पर घोषणाएं किए थे,जो भी असुविधाएं है उसके लिए हम सभी लोग मदद करेंगे।

इन घोषणाओं से छात्र-छात्राओं में बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन करीब 10 महीने बीत जाने के बाद भी अधिकांश वादे भाषण तक ही सीमित रह गए न तो विभागीय मद से सहायता मिली और न ही व्यक्तिगत सहयोग के रूप में कोई ठोस पहल सामने आई।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि कई लोगों ने मंच से बड़ी-बड़ी बातें तो कीं, लेकिन बाद में महाविद्यालय की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। स्थिति यह है कि आज तक घोषणा करने वाले कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी महाविद्यालय का जायजा लेने तक नहीं पहुंचे।
वर्तमान में महाविद्यालय में फर्नीचर, बैठने की समुचित व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्र-छात्राएं असुविधाओं के बीच शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और छात्र-छात्राएं अब जिम्मेदारों से जल्द वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।


इनका कहना है 

“जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने महाविद्यालय में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उन वादों का असर जमीन पर दिखाई नहीं दिया। फर्नीचर, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण पढ़ाई में परेशानी हो रही है।”

शुभम मिश्रा,
महाविद्यालय छात्र,मड़वास

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