Sidhi News: वर्षा ऋतु में जल-जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश

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Sidhi News: वर्षा ऋतु में जल-जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश


Sidhi News: वर्षा ऋतु में जल-जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश



सीधी

 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक खरे ने बताया कि वर्षा ऋतु में अतिवृष्टि, जलभराव तथा पेयजल स्रोतों के प्रदूषित होने से जल-जनित रोगों की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए उल्टी-दस्त, पेचिश, पीलिया, टाइफाइड, अमीबायसिस, जिआर्डियासिस, कृमि संक्रमण एवं हैजा जैसी बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जिले के स्वास्थ्य संस्थानों को पूर्व तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  निर्देशों के तहत विकासखंडों में बाढ़ संभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों के समस्याग्रस्त ग्रामों को चिह्नित कर उनकी निगरानी के लिए स्थानीय प्रशासन के समन्वय से नियंत्रण कक्ष स्थापित करने को कहा गया है। मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। नियंत्रण कक्ष के बाहर नोडल अधिकारी का नाम एवं दूरभाष क्रमांक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

मैदानी अमले को दिया जाएगा प्रशिक्षण

आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी एवं ब्लॉक कॉम्बैट टीम के माध्यम से आशा कार्यकर्ता, एएनएम, एमपीडब्ल्यू, सीएचओ, एलएचव्ही एवं पुरुष पर्यवेक्षकों को प्राथमिक उपचार तथा रोगियों के वर्गीकरण संबंधी विषयों पर उन्मुखीकरण दिया जाएगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता पड़ने पर राहत शिविरों के संचालन के लिए स्थानीय प्रशासन के सहयोग से चिकित्सा दल गठित किए जाएंगे। शिविरों में चिकित्सा सेवाओं के साथ संक्रामक रोगों की रोकथाम की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी।

दवाओं और जीवनरक्षक सामग्री का पर्याप्त भंडारण

स्वास्थ्य संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आघात प्रबंधन, वयोवृद्धों की चिकित्सा तथा गंभीर रोगियों की देखभाल जैसी आवश्यक सेवाएं निर्बाध संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, यकृत, गुर्दा एवं श्वसन संबंधी दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित मरीजों की निगरानी की भी व्यवस्था की जाएगी।

  जल-जनित एवं वाहक-जनित रोगों की स्थिति से निपटने के लिए ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां, पैरासिटामोल, मेट्रोनिडाजोल, मेटोक्लोप्रामाइड, आवश्यक प्रतिजैविक औषधियां, अंतःशिरा द्रव, कृमिनाशक एवं अन्य आवश्यक दवाओं के साथ टीके और ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्पदंश और जंतु-दंश के उपचार की भी व्यवस्था

बाढ़ के दौरान चोट एवं घाव के मामलों की संभावना को देखते हुए पोविडोन आयोडीन, पट्टियां तथा घाव की सफाई एवं मरहम-पट्टी की सामग्री पर्याप्त मात्रा में रखने को कहा गया है। सर्पदंश, कुत्ते के काटने एवं अन्य जंतु-दंश की घटनाओं के उपचार के लिए सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंशरोधी विषरोधी औषधि, रेबीजरोधी टीका एवं रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

मॉक ड्रिल और वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पर जोर

अचानक बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव, मरीजों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान तथा एम्बुलेंस से परिवहन की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। सभी अस्पतालों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जीवनरक्षक उपकरणों का संचालन जारी रखने के लिए वैकल्पिक बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भूतल अथवा तहखानों में स्थित महत्वपूर्ण चिकित्सा कक्षों को संभावित जलभराव से बचाने के लिए आवश्यकता अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना भी तैयार की जाएगी।

विभागों के बीच समन्वय से तैयार होगी कार्ययोजना

आपात स्थिति में त्वरित उपचार के लिए निजी चिकित्सा संस्थानों, गैर-शासकीय संस्थाओं एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पूर्व तैयारियां सुनिश्चित की जाएंगी। वन, पुलिस, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा मौसम विभाग सहित संबंधित विभागों के समन्वय से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में महामारी नियंत्रण के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
  विकासखंड स्तर पर चिकित्सकों की त्वरित प्रतिक्रिया टीम तैयार रखी जाएगी। परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक समन्वय एवं कार्रवाई की जिम्मेदारी मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी एवं नामित आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।

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